बिजली चोरों पर सरकार का प्रहार तेज हो गया है। देशभर में बिछाए गए AI के जाल ने चोरों की नींद उड़ा दी है। स्मार्ट मीटर और हाईटेक निगरानी से अब कटिया डालना या मीटर बाइपास करना नामुमकिन हो गया है। पकड़े गए तो भारी जुर्माना और सीधी जेल का रास्ता। यह नया नियम ईमानदार उपभोक्ताओं को राहत देने और बिजली कंपनियों के राजस्व को बचाने का बड़ा कदम है।

Table of Contents
AI का डिजिटल जाल कैसे काम कर रहा है?
सरकार ने रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा है। ये मीटर रीयल-टाइम डेटा कंट्रोल रूम भेजते हैं, जहां AI असामान्य खपत पैटर्न को तुरंत पकड़ लेता है। उदाहरण के लिए, बिहार के मुजफ्फरपुर में AI ने ट्रांसफार्मर स्तर पर नेट मीटरिंग यूनिट्स से मीटर बाइपास और हुकिंग डिटेक्ट की।
गूगल अर्थ जैसी तकनीक से जीरो यूनिट खपत वाले घरों पर लाल निशान लगता है, और जूनियर इंजीनियरों के मोबाइल पर सटीक लोकेशन आ जाती है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में रातोंरात छापेमारी बढ़ गई है। आर्मर्ड केबल्स ने चोरी को और कठिन बना दिया है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर निगेटिव बैलेंस वालों को सीधे रडार पर ला देते हैं।
सख्त कानूनी प्रावधान
विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत बेईमानी से चोरी पर पहली बार पकड़े जाने वाले को चोरी राशि का तीन गुना जुर्माना और 6 माह से 2 साल जेल हो सकती है। दोबारा पकड़े जाने पर छह गुना फाइन और 2 से 5 साल की सजा। 10 किलोवाट से कम लोड पर पहली बार तीन गुना जुर्माना या 3 साल जेल, दूसरी बार छह गुना। 10 किलोवाट से ज्यादा पर अनिवार्य जेल और कनेक्शन 3 माह से 2 साल कट सकता है। धारा 126 अनजाने अनधिकृत उपयोग के लिए है, जहां निरीक्षण अधिकारी 48 घंटे में अनंतिम आकलन जारी करता है। अपील के बाद 7 दिनों में समीक्षा होती है। बड़े रैकेट्स पर 50 हजार से 10 लाख तक दंड और FIR दर्ज। कनेक्शन कटने के साथ पुराने बिलों पर चक्रवृद्धि ब्याज भी लगता है।
इनाम योजना और राहत के मौके
चोरी की सूचना देने वालों को वसूली का 10 प्रतिशत या 50 हजार तक इनाम मिलेगा, नाम गोपनीय रहेगा। टोल-फ्री नंबर या ऐप से शिकायत आसान। बिजली बिल राहत योजना 2025-26 के दूसरे चरण में चोरी मामलों पर 45-50 प्रतिशत छूट मिल रही है। नेशनल लोक अदालतों में समझौते से पुराने केस निपटाए जा रहे हैं। यह सुधरने वालों को मौका देता है, ताकि सस्ती बिजली सबको मिले।
क्या प्रभाव होगा?
पिछले तीन माह में हजारों चोर पकड़े गए, करोड़ों की वसूली हुई। बिहार में 423 मामले उजागर, 41 लाख की चोरी रुकी। ईमानदार उपभोक्ताओं के बिल कम हुए। सरकार का लक्ष्य 2026 तक चोरी मुक्त बिजली वितरण है। स्मार्ट मीटर नियम और सख्त हुए हैं, रीयल-टाइम बिलिंग से पारदर्शिता बढ़ी।
















