आयकर रिटर्न भरने का जटिल और लंबा प्रोसेस अब सैलरीड कर्मचारियों के लिए बच्चों का खेल बन गया है। केंद्र सरकार की Auto-ITR सुविधा और 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहे नए आयकर नियमों ने टैक्स फाइलिंग को पूरी तरह डिजिटल और सरल बना दिया है। प्री-फिल्ड डेटा के साथ बस वेरिफाई और सबमिट का काम रह गया है, जिससे चार्टर्ड अकाउंटेंट के चक्कर लगाने की मजबूरी खत्म हो गई। यह बदलाव करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए वरदान साबित हो रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो सालाना 50 लाख तक कमाई करते हैं।

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Auto-ITR सुविधा की शुरुआत
Auto-ITR इनकम टैक्स विभाग की नई ऑनलाइन पहल है, जो PAN कार्ड से जुड़े सभी डेटा को स्वचालित रूप से ITR फॉर्म में भर देती है। फॉर्म 16, 26AS, एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्स इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (TIS) जैसी जानकारी पोर्टल पर पहले से उपलब्ध हो जाती है। सैलरी इनकम, टीडीएस कटौती, बैंक ब्याज, हाउस प्रॉपर्टी से किराया और कैपिटल गेन तक सब कुछ ऑटोमैटिकली भरा मिलता है।
नतीजा यह होता है कि मैनुअल डेटा एंट्री में होने वाली गलतियां लगभग शून्य हो जाती हैं। फाइलिंग प्रक्रिया, जो पहले घंटों लगती थी, अब महज 10-15 मिनट में पूरी हो जाती है। यह सुविधा खासतौर पर ITR-1, ITR-2 और ITR-4 फॉर्म्स के लिए डिजाइन की गई है, जो ज्यादातर सैलरीड क्लास और छोटे व्यापारियों द्वारा इस्तेमाल होते हैं।
नए टैक्स नियम
बजट 2026 में वित्त मंत्री ने आयकर अधिनियम 1961 को सरल नए कानून से बदलने की घोषणा की। 1 अप्रैल 2026 से ITR फॉर्म्स में चैप्टर्स की संख्या 50 से घटकर मात्र 14 रह जाएगी। भाषा को आम बोलचाल की शब्दावली में ढाला गया है, ताकि कानूनी जटिलताएं न रहें। सबसे बड़ा बदलाव प्री-पॉपुलेटेड डेटा का अनिवार्य होना है, जहां टैक्सपेयर को सिर्फ चेकबॉक्स टिक करने या मामूली सुधार करने होते हैं।
नॉन-ऑडिट केसेज में JSON या एक्सेल यूटिलिटी की जगह सीधा ऑनलाइन सबमिशन होगा। इससे न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि रिफंड प्रोसेस भी तेज हो जाएगा, अब 10-15 दिनों में पैसे खाते में आ जाएंगे। विवादास्पद मामलों में नोटिस कम आएंगे, क्योंकि डेटा पहले से मैच हो चुका होगा।
स्टेप-बाय-स्टेप ITR फाइलिंग गाइड
- ITR फाइल करना अब बेहद आसान है। सबसे पहले incometax.gov.in पर PAN और आधार से लॉगिन करें।
- डैशबोर्ड पर ‘पेंडिंग एक्शन्स’ सेक्शन में ‘फाइल इनकम टैक्स रिटर्न’ चुनें और असेसमेंट ईयर 2025-26 सिलेक्ट करें।
- Auto-ITR ऑप्शन पर क्लिक करने से फॉर्म खुल जाएगा, जहां सारी डिटेल्स भरी मिलेंगी।
- फॉर्म 16 से मैच करके जरूरी बदलाव करें, जैसे 80C के तहत एलआईसी या पीपीएफ डिडक्शन ऐड करना।
- टैक्स रीकैलकुलेट बटन दबाएं, अगर बकाया हो तो चालान से पेमेंट करें।
- आखिर में डिक्लेरेशन स्वीकार करें और e-Verify करें।
- आधार ओटीपी सबसे तेज तरीका है, या नेट बैंकिंग, ईमेल या डाक से भी वेरिफाई कर सकते हैं।
- गलती से डेटा चेंज न करें, वरना नोटिस आ सकता है।
- AY 2025-26 की डेडलाइन 15 सितंबर 2025 थी, लेकिन अगले साल समयसीमा बढ़ सकती है।
किन्हें मिलेगा अधिकतम लाभ
यह सुविधा सैलरीड कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, छोटे व्यापारियों और घर से काम करने वालों के लिए सबसे फायदेमंद है। जिनकी एक ही सोर्स से इनकम है, वे पूरी तरह सेल्फ-फाइलिंग कर सकेंगे। फ्रीलांसर्स या मल्टीपल इनकम सोर्स वाले अभी विशेषज्ञ से सलाह लें। नए नियम डिजिटल इंडिया को मजबूत करेंगे, टैक्स चोरी रोकेेंगे और कलेक्शन बढ़ाएंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि 90 प्रतिशत मामलों में अब CA की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि हर टैक्सपेयर खुद फाइल करे, जिससे सिस्टम पारदर्शी बने।
भविष्य की संभावनाएं
Auto-ITR और नए नियम टैक्स सिस्टम को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से और भी स्मार्ट फीचर्स जुड़ेंगे, जैसे वॉयस असिस्टेंट से फाइलिंग। टैक्सपेयर्स को सलाह है कि नियमित रूप से पोर्टल चेक करें और डेटा अपडेट रखें। इस बदलाव से न केवल झंझट कम होगा, बल्कि टैक्स अनुपालन बढ़ेगा। अब टैक्स भरना बोझ नहीं, सुविधा बन गया है।
















