वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर से जुड़ी है, लेकिन यहां भारी सामान रखना आर्थिक परेशानियों को न्योता दे सकता है। अनुभवी वास्तुजनों का कहना है कि यह दिशा हमेशा हल्की और खुली रखनी चाहिए, वरना सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है। लाखों परिवार आज भी वास्तु नियमों का पालन कर समृद्धि प्राप्त कर रहे हैं।

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उत्तर दिशा का वास्तु महत्व
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को मां लक्ष्मी और कुबेर का निवास माना जाता है। यह धन आगमन का द्वार है, जहां अलमारी, सोफा या भारी फर्नीचर रखने से नकारात्मक ऊर्जा जमा हो जाती है। इससे घर में कर्ज बढ़ता है और नौकरी या बिजनेस में रुकावटें आती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्राचीन ग्रंथों में इस दिशा को हल्का रखने का स्पष्ट आदेश है। कई लोग अनजाने में गलती करते हैं, जिससे पारिवारिक कलह भी बढ़ता है।
क्यों लगता है वास्तु दोष?
उत्तर दिशा में भारी भार डालने से वातावरण में असंतुलन पैदा होता है। कबाड़, पुराने सामान या मशीनें यहां रखने से कंगाली के दरवाजे खुल जाते हैं। वास्तुजनों के अनुभव से पता चलता है कि ऐसे घरों में सदस्यों की एकाग्रता भंग होती है और स्वास्थ्य समस्याएं उभरती हैं। यह दोष पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल सकता है, जब तक सुधार न किया जाए। छोटी सी लापरवाही बड़ी मुसीबत बन जाती है।
वैज्ञानिक कारण जो चौंकाते हैं
वास्तु को आधुनिक विज्ञान भी समर्थन देता है। पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र उत्तर दिशा को प्रभावित करता है, जहां भारी वस्तुएं ऊर्जा संतुलन बिगाड़ देती हैं। इससे घर में प्रकाश और हवा का प्रवाह कम होता है, जो तनाव बढ़ाता है। अध्ययनों में पाया गया कि दिशा-अनुसार व्यवस्था से मानसिक शांति मिलती है और उत्पादकता बढ़ती है। दक्षिण-पश्चिम दिशा भारी सामान के लिए आदर्श है, क्योंकि वहां गुरुत्वाकर्षण संतुलित रहता है। ये नियम प्रकृति के साथ तालमेल सिखाते हैं।
सुधार के सरल उपाय अपनाएं
उत्तर दिशा को साफ रखें और जल तत्व जैसे फाउंटेन या कलरफुल पर्दे लगाएं। भारी सामान तुरंत दक्षिण-पश्चिम में शिफ्ट करें। स्टोर रूम या सीढ़ियां इसी दिशा में बनाएं। तुलसी या मनी प्लांट लगाने से सकारात्मकता बढ़ेगी। गंगाजल छिड़काव से शुद्धि होती है। इन बदलावों से कई परिवारों ने आर्थिक उन्नति देखी है। रोजाना सफाई का नियम बनाएं।
















