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Ancestral Property: खानदानी जमीन बेचना अब होगा बेहद मुश्किल! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बदल गया सालों पुराना कानून।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने पैतृक संपत्ति के नियम बदल दिए। अब अविभाजित खानदानी जमीन बेचने के लिए सभी वारिसों की सहमति जरूरी। बेटियों को बराबर हक, विवाद कम होंगे। ग्रामीण परिवारों के लिए वरदान, पारदर्शिता बढ़ेगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने पैतृक संपत्ति के बंटवारे और बिक्री के पुराने नियमों को तहस-नहस कर दिया है। अब संयुक्त हिंदू परिवार की अविभाजित खानदानी जमीन या मकान बेचने के लिए सभी वारिसों की सहमति अनिवार्य हो गई है। यह फैसला लाखों परिवारों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि पहले एक भाई या सदस्य चुपके से संपत्ति बेचकर सबके हक पर डाका डाल देता था। संपत्ति विवादों की जड़ अब कटेगी और पारदर्शिता का दौर शुरू होगा।

Ancestral Property: खानदानी जमीन बेचना अब होगा बेहद मुश्किल! सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बदल गया सालों पुराना कानून।

फैसले का पूरा आधार

कोर्ट ने साफ कहा कि चार पीढ़ियों तक चली आ रही पैतृक संपत्ति संयुक्त रहती है, जब तक कानूनी बंटवारा न हो। अंगड़ी चंद्रन्ना बनाम शंकर मामले में अप्रैल 2025 को यह सिद्धांत दोहराया गया। कोई एक वारिस अकेले दावा नहीं ठोक सकता। सभी भाई-बहनों, बेटियों और अन्य सह-वारिसों की लिखित सहमति के बिना बिक्री अमान्य मानी जाएगी। नाबालिग बच्चों के हिस्से पर अदालत की इजाजत जरूरी होगी। लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा संतानों को भी वैवाहिक बच्चों जैसा हक मिल सकता है, यदि संबंध साबित हो।

बंटवारे के बाद की आजादी

यदि संपत्ति का बंटवारा पहले ही हो चुका है, तो मिला हिस्सा स्व-अर्जित संपत्ति बन जाता है। ऐसे में मालिक अपनी मर्जी से बेच सकता है, बिना किसी की सहमति के। उदाहरण के तौर पर, पिता से विरासत में मिली 1.7 हेक्टेयर जमीन बंटवारे के बाद बेची जा सकती है। लेकिन अविभाजित स्थिति में सभी की रजामंदी बाध्यकारी है। मद्रास हाईकोर्ट ने भी बेटी को आधा हिस्सा देते हुए इसीकी पुष्टि की।

पुराने और नए नियमों में फर्क

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत पहले पिता की संपत्ति को स्व-अर्जित माना जाता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के नए फैसलों ने स्पष्ट किया कि खानदानी संपत्ति संयुक्त परिवार की होती है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में दोहराया कि कर्ता द्वारा खरीदी संपत्ति भी संयुक्त मानी जाएगी, जब तक विपरीत साबित न हो। अब विवाद कम होंगे, क्योंकि हर वारिस को निष्पक्ष हिस्सा मिलेगा।

ग्रामीण भारत पर गहरा असर

पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में खानदानी जमीनें हमेशा झगड़ों का केंद्र रहीं। यह फैसला ग्रामीण परिवारों के लिए वरदान है। कोर्ट केस घटेंगे, बाजार में साफ टाइटल वाली संपत्ति बढ़ेगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दस्तावेजों की जांच करवाएं, वकील से मिलें और पारिवारिक बैठक बुलाएं। संपत्ति बेचने से पहले सभी को शामिल करें। इससे न केवल धन की हिफाजत होगी, बल्कि रिश्ते भी मजबूत होंगे। सरकार को भी अब नए कानून लाने चाहिए, ताकि जमीनी हकीकत के अनुरूप नियम बने। यह बदलाव न सिर्फ कानूनी, बल्कि सामाजिक क्रांति का संकेत है।

Author
info@ortpsa.in

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