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EPFO Pension Rule: अगर पति की दो पत्नियां हैं, तो किसे मिलेगी पेंशन? जानें कानून का पूरा गणित और हक

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिलने वाली पेंशन को लेकर अक्सर परिवारों में विवाद की स्थिति देखी जाती है, खासकर तब जब मामला एक से अधिक पत्नियों का हो ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि पति की मृत्यु के बाद ईपीएस (EPS) पेंशन पर किसका असली हक होगा? क्या दूसरी पत्नी को भी यह लाभ मिल सकता है? आइए जानते हैं कानून का पूरा गणित

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EPFO Pension Rule: अगर पति की दो पत्नियां हैं, तो किसे मिलेगी पेंशन? जानें कानून का पूरा गणित और हक
EPFO Pension Rule: अगर पति की दो पत्नियां हैं, तो किसे मिलेगी पेंशन? जानें कानून का पूरा गणित और हक

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत मिलने वाली पेंशन को लेकर अक्सर परिवारों में विवाद की स्थिति देखी जाती है, खासकर तब जब मामला एक से अधिक पत्नियों का हो ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि पति की मृत्यु के बाद ईपीएस (EPS) पेंशन पर किसका असली हक होगा? क्या दूसरी पत्नी को भी यह लाभ मिल सकता है? आइए जानते हैं कानून का पूरा गणित।

पहली पत्नी का पलड़ा भारी, दूसरी के लिए डगर मुश्किल

भारतीय कानून और EPFO के नियमों के मुताबिक, पेंशन का प्राथमिक अधिकार पहली पत्नी का ही होता है हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत पहली पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी करना अवैध माना जाता है ऐसी स्थिति में, ईपीएफओ रिकॉर्ड में पहली पत्नी को ही कानूनी रूप से वैध उत्तराधिकारी माना जाता है। 

क्या नॉमिनी होने से बदल जाएगा हक?

एक बड़ा भ्रम यह है कि यदि पति ने दूसरी पत्नी को ‘नॉमिनी’ (Nominee) बना दिया है, तो उसे ही पैसा मिलेगा, लेकिन कानूनन ऐसा नहीं है, यदि पहली पत्नी जीवित है और तलाक नहीं हुआ है, तो वह नॉमिनेशन को अदालत में चुनौती दे सकती है कानूनी मिसालों के अनुसार, पेंशन के मामले में ‘कानूनी वारिस’ का हक ‘नॉमिनी’ से ऊपर होता है। 

किन स्थितियों में दूसरी पत्नी को मिलेगी पेंशन?

नियमों के कुछ अपवाद भी हैं, जिनमें दूसरी पत्नी पेंशन की हकदार बन सकती है:

  • कानूनी अलगाव: यदि पहली पत्नी से कानूनी रूप से तलाक हो चुका हो और उसके बाद दूसरी शादी की गई हो।
  • पहली पत्नी की मृत्यु: यदि पहली पत्नी की मृत्यु के बाद कर्मचारी ने दूसरी शादी की है, तो वह पूरी तरह वैध मानी जाएगी।
  • मुस्लिम पर्सनल लॉ: यदि कर्मचारी मुस्लिम पर्सनल लॉ के अधीन आता है, जहाँ एक से अधिक शादियाँ मान्य हैं, तो पेंशन का पैसा दोनों पत्नियों के बीच बराबर विभाजित किया जा सकता है। 

बच्चों के हक पर कोई आंच नहीं

भले ही दूसरी पत्नी की शादी कानूनी रूप से वैध न मानी जाए, लेकिन दोनों पत्नियों के बच्चों का हक सुरक्षित रहता है ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, मृतक कर्मचारी के सभी बच्चे (25 वर्ष की आयु तक) पेंशन के समान हकदार होते हैं एक समय में अधिकतम दो बच्चों को यह लाभ मिल सकता है। 

विवाद की स्थिति में क्या करें?

यदि पेंशन को लेकर पत्नियों के बीच विवाद बढ़ता है, तो ईपीएफओ विभाग मामला तब तक लंबित रख सकता है जब तक कि ‘सक्सेशन सर्टिफिकेट’ (Succession Certificate) या कोर्ट का आदेश न मिल जाए विशेषज्ञों की सलाह है कि विवाद से बचने के लिए ई-नॉमिनेशन (e-Nomination) को हमेशा अपडेट रखना चाहिए और कानूनी स्थिति स्पष्ट रखनी चाहिए। 

EPFO EPFO Pension Rule
Author
info@ortpsa.in

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