
संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में आज उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ठ सांसद ने मुसलमानों को OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी से बाहर करने की पुरजोर मांग उठाई इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
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‘धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक’
शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान बीजेपी सांसद और ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. लक्ष्मण ने इस संवेदनशील मुद्दे को उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि कई राज्य सरकारें “वोट बैंक की राजनीति” के चलते पूरे मुस्लिम समुदाय को ओबीसी सूची में शामिल कर रही हैं। लक्ष्मण ने कहा, “संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में जिस तरह से मुस्लिम आरक्षण दिया जा रहा है, वह वास्तविक पिछड़े वर्गों के हक पर डाका डालने जैसा है।”
विपक्षी दलों का सदन से वॉकआउट
सांसद लक्ष्मण के बयानों पर विपक्षी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई। कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके सहित ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने इसे “विभाजनकारी एजेंडा” करार दिया। विपक्ष का कहना था कि आरक्षण सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया जाता है और इसमें धर्म को लाना गलत है। शोर-शराबे और हंगामे के बीच, विरोध दर्ज कराते हुए विपक्षी सदस्य सदन की कार्यवाही छोड़कर बाहर चले गए।
इन राज्यों के मॉडल पर उठाए सवाल
सदन में चर्चा के दौरान सांसद ने कुछ राज्यों के विशिष्ट उदाहरण पेश किए:
- कर्नाटक: आरोप लगाया कि पूरी मुस्लिम आबादी को एक ब्लॉक मानकर 4% आरक्षण दिया जा रहा है।
- पश्चिम बंगाल: दावा किया गया कि वहां 90% से अधिक मुस्लिम समुदायों को ओबीसी का लाभ मिल रहा है।
- तेलंगाना और केरल: इन राज्यों में भी मुस्लिम समूहों को दिए जा रहे व्यापक आरक्षण की समीक्षा की मांग की गई।
सरकार का प्रहार
विपक्ष के वॉकआउट पर सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने पलटवार किया उन्होंने कहा कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है क्योंकि वे “तुष्टीकरण की राजनीति” के आदी हो चुके हैं उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है और इस पर व्यापक बहस जरूरी है।
राजनीतिक माहौल गर्म
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुस्लिम आरक्षण को लेकर लिए गए फैसलों के बाद, संसद में उठा यह मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले सकता है। जानकारों का मानना है कि ‘मुस्लिम ओबीसी कोटा’ पर शुरू हुई यह बहस अब कानूनी और राजनीतिक गलियारों में और तेज होगी।
















