
भारतीय रेल को देश की लाइफलाइन कहा जाता है हर रोज करोड़ों यात्री इसमें सफर करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आप जिस कोच में बैठे हैं, उसमें कुल कितनी सीटें हैं? अक्सर यात्रियों को लगता है कि स्लीपर कोच में सबसे ज्यादा भीड़ होती है तो सीटें भी वहीं ज्यादा होंगी, लेकिन असलियत आपको चौंका सकती है।
रेलवे के आधुनिक होते स्वरूप में अब कोच के डिजाइन और क्लास के आधार पर सीटों की संख्या तय की जाती है। आइए जानते हैं किस कोच में कितनी बर्थ होती हैं।
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3-टियर एसी इकोनॉमी (3E): सीटों का नया ‘सुपरस्टार’
अगर आप सोच रहे हैं कि स्लीपर क्लास में सबसे ज्यादा सीटें होती हैं, तो आप गलत हैं। भारतीय रेलवे के नए 3-टियर एसी इकोनॉमी कोच ने इस मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है। बेहतर स्पेस मैनेजमेंट के जरिए इस एक कोच में कुल 83 बर्थ लगाई गई हैं। यह वर्तमान में स्लीपिंग कोच की श्रेणी में सबसे अधिक क्षमता वाला कोच है।
स्लीपर क्लास (Sleeper Class): क्षमता और डिजाइन का खेल
स्लीपर क्लास में सीटों की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि कोच पुराना (ICF – नीला) है या आधुनिक (LHB – लाल)।
- LHB कोच: इसमें 80 सीटें होती हैं।
- ICF कोच: पुराने नीले कोचों में 72 सीटें हुआ करती थीं।
थर्ड एसी (3rd AC): मध्यम वर्ग की पहली पसंद
3rd AC कोच में सुविधाओं के साथ-साथ सीटों का तालमेल बिठाया गया है।
- LHB कोच: यहाँ 72 बर्थ होती हैं।
- ICF कोच: पुराने कोचों में यह संख्या 64 थी।
लग्जरी कोच: सेकंड और फर्स्ट एसी
जैसे-जैसे किराया और सुविधाएं बढ़ती हैं, सीटों की संख्या कम होती जाती है ताकि यात्रियों को ज्यादा जगह (Space) मिल सके।
- सेकंड एसी (2nd AC): LHB कोच में 54 और पुराने ICF कोच में 46 से 48 सीटें होती हैं।
- फर्स्ट एसी (1st AC): यह सबसे प्रीमियम श्रेणी है। LHB कोच में मात्र 24 से 26 सीटें होती हैं, जबकि पुराने कोचों में यह संख्या 18 से 22 के बीच रहती है।
जनरल और चेयर कार का क्या है हाल?
बिना रिजर्वेशन वाले जनरल कोच में बैठने की आधिकारिक क्षमता तो 90 से 100 के बीच होती है, लेकिन भीड़ के समय यहाँ गिनती करना नामुमकिन हो जाता है। वहीं, बैठने वाले सेकंड सीटिंग (2S) कोच में सबसे ज्यादा 108 सीटें तक हो सकती हैं।
तकनीकी रूप से देखें तो बैठने वाले 2S कोच में सबसे अधिक यात्री समा सकते हैं, लेकिन सोने वाली (Sleeper/AC) श्रेणियों में 3rd AC इकोनॉमी कोच फिलहाल ‘किंग’ है।
















