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वसीयत नहीं की तो क्या होगा? एक पिता के 4 बेटों के बीच कैसे बंटती है संपत्ति; जानें ‘हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम’ का नया नियम

पिता के बिना वसीयत के चल बसे तो चार बेटों में संपत्ति बराबर बंटेगी। हिंदू कानून में पत्नी-बेटी भी हकदार। पैतृक संपत्ति जन्म से साझा। विवाद से बचें, वसीयत बनाएं।

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आज के दौर में संपत्ति विवाद परिवारों को तोड़ रहे हैं। अगर कोई हिंदू पिता बिना वसीयत के चल बसा, तो उसकी कमाई या जमीन का क्या होगा? खासकर चार बेटों वाले परिवार में स्थिति और सरल लगती है, लेकिन कानून की बारीकियां जानना जरूरी है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के नियमों से संपत्ति बराबर बंटती है, फिर भी विवादों से बचने के लिए जागरूकता जरूरी।

वसीयत नहीं की तो क्या होगा? एक पिता के 4 बेटों के बीच कैसे बंटती है संपत्ति; जानें 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम' का नया नियम

वर्ग-1 उत्तराधिकारियों को प्राथमिकता

कानून कहता है कि बिना वसीयत के पहले पत्नी, बेटे, बेटियां और मां को हिस्सा मिलता है। चार बेटों के मामले में अगर पत्नी या बेटी न हो, तो संपत्ति चार बराबर भागों में बंट जाएगी। हर बेटे को एक चौथाई अधिकार। लेकिन अगर पत्नी जीवित हो, तो वह भी बराबर का हकदार बनेगी। यह व्यवस्था 2005 के बदलाव से और मजबूत हुई, जब बेटियों को बेटों जैसा दर्जा मिला। परिवार में शांति बनाए रखने के लिए सभी को समान अवसर सुनिश्चित किया गया।

पैतृक बनाम स्व-अर्जित संपत्ति का फर्क

दादा या परदादा से चली आ रही पैतृक संपत्ति जन्म से ही बेटों-बेटियों का हक बन जाती है। पिता इस पर अपनी मर्जी नहीं चला सकता। वहीं, खुद की मेहनत से बनी संपत्ति पर वसीयत का अधिकार होता है। बिना वसीयत के यह भी वही बंटवारा झेलती है। उदाहरण लें, मान लीजिए पिता ने 50 लाख की प्रॉपर्टी कमाई। चार बेटों में बंटेगी तो हरेक को 12.5 लाख। पत्नी के साथ पांच हिस्सों में बंटेगी। यह नियम हिंदू, बौद्ध और जैन परिवारों पर लागू होता है।

हालिया बदलाव और अदालती फैसले

पिछले सालों में सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों के हक को पक्का किया। पुराने फैसलों को नकारते हुए कहा गया कि जन्म के बाद सब बराबर। कुछ राज्य पारंपरिक संयुक्त परिवार प्रथा खत्म करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। फिर भी बुनियादी नियम जस के तस हैं। अगर वर्ग-1 में कोई न हो, तो पिता, भाई या बहन को हिस्सा जाता है। उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में ऐसे केस 30 प्रतिशत बढ़े हैं।

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विवादों से बचाव के उपाय

वकील सलाह देते हैं कि रजिस्टर्ड वसीयत बनाएं। इससे इच्छा स्पष्ट हो जाती है और कर, स्टांप ड्यूटी जैसे खर्च बचते हैं। चार बेटों वाले परिवार में बंटवारा आसान लगे, लेकिन छोटी सी गलती से कोर्ट-कचहरी का चक्कर लग जाता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं के अधिकार मजबूत हो रहे हैं, इसलिए परिवारों को नई पीढ़ी के साथ तालमेल बिठाना चाहिए।

परिवार पहले, संपत्ति बाद में

संपत्ति से ज्यादा अमूल्य रिश्ते हैं। वसीयत न करने का जोखिम न लें। स्थानीय रजिस्ट्रार या वकील से संपर्क कर सही कदम उठाएं। कानून परिवार की एकता बचाने के लिए बना है, इसका सदुपयोग करें।

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info@ortpsa.in

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