
देश के करोड़ों रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है, केंद्र सरकार ने एलपीजी (LPG) सिलेंडर की झंझट को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में अपना ‘पीएनजी मास्टरप्लान’ अधिसूचित कर दिया है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरकार अब देश के हर घर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम करेगी।
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‘एक घर, एक गैस’ का नया नियम
सरकार ने साफ कर दिया है कि अब उपभोक्ता एक साथ एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन नहीं रख सकेंगे नए मास्टरप्लान के तहत, जिन क्षेत्रों में पीएनजी की पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वहां उपभोक्ताओं को अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन अनिवार्य रुप से सरेंडर करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों या एलपीजी कनेक्शन न छोड़ने वालों को भविष्य में सिलेंडर की रिफिलिंग की सुविधा नहीं मिलेगी।
2034 तक 12.63 करोड़ कनेक्शन का लक्ष्य
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने इस विस्तार के लिए बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं:
- विस्तार: वर्तमान में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क देश के 784 जिलों को कवर कर रहा है।
- बड़ा लक्ष्य: साल 2034 तक देश भर में करीब 12.63 करोड़ घरों को पाइप वाली गैस से जोड़ने का लक्ष्य है।
- नेशनल पीएनजी ड्राइव: इस प्रक्रिया को गति देने के लिए 1 जनवरी 2026 से ‘नेशनल पीएनजी ड्राइव 2.0’ की शुरुआत की जा चुकी है।
अड़चनों को दूर करने के लिए ‘डीम्ड क्लीयरेंस’
पाइपलाइन बिछाने के काम में आने वाली प्रशासनिक देरी को खत्म करने के लिए सरकार ने ‘डीम्ड क्लीयरेंस’ की व्यवस्था लागू की है, अब अगर संबंधित विभाग एक तय समय सीमा के भीतर अनुमति नहीं देता है, तो उसे स्वतः मंजूर मान लिया जाएगा साथ ही, निजी जमीन पर पाइपलाइन ले जाने के लिए मुआवजे का विवाद सुलझाने हेतु ‘सर्किल रेट’ आधारित एक फिक्स फॉर्मूला भी तैयार किया गया है।
सस्ता और सुरक्षित विकल्प
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी न केवल एलपीजी की तुलना में सस्ती है, बल्कि यह अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक भी है, गैस वितरण कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई तरह के ‘वेलकम ऑफर’ और विशेष छूट भी दे रही हैं।
















