मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए पहले 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर पांच दिन कर दिया गया है। इस बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी देते हुए कहा है कि अमेरिकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पिछले 20 दिनों से चल रही जंग ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है और हजारों लोग मारे जा चुके हैं।

ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान ने जल्द जलडमरूमध्य नहीं खोला तो उसके बिजली संयंत्रों पर हमला होगा। ईरान ने इसे चुनौती के रूप में लिया और मध्य पूर्व के तेल कुओं तथा महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाने की बात कही। खामेनेई के करीबी नेता मोजतबा ने बयान जारी कर कहा कि होर्मुज बंद रहेगा और अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अमेरिका ने फिलहाल कोई नया हमला रोका हुआ है, शायद कूटनीतिक प्रयासों के दबाव में।
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घटनाक्रम की रूपरेखा
यह संकट फरवरी में शुरू हुआ जब ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते के लिए दस दिन का समय दिया। ईरान ने इनकार कर दिया। 21 मार्च को नया अल्टीमेटम आया, जिसमें होर्मुज पर जोर था। ईरान ने मिसाइलें दागीं और अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचाया। इजरायल ने भी ईरानी स्थलों पर हमले तेज कर दिए। अगले दिन ट्रंप ने समयसीमा बढ़ा दी। अब पांच दिन बाद क्या होगा, यह सवाल दुनिया को सता रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का रास्ता है। ईरान ने इसे अवरुद्ध कर रखा है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत जैसे देश जो तेल आयात पर निर्भर हैं, वे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। अमेरिकी जनता में युद्ध के खिलाफ गुस्सा भड़क रहा है, करीब दो तिहाई लोग विरोध कर रहे हैं। जिनेवा में चल रही बातचीत से कुछ उम्मीद बंधी है, लेकिन ईरान की जिद बरकरार है।
महायुद्ध टलने की उम्मीदें
विशेषज्ञों का मानना है कि समय बढ़ाने से कूटनीति को मौका मिला है। आर्थिक नुकसान और जन विरोध एस्केलेशन रोक सकते हैं। लेकिन ईरान की जवाबी धमकियां संतुलन बिगाड़ सकती हैं। ट्रंप की अमेरिका पहले नीति अब कसौटी पर है। वैश्विक बाजारों में सोना चांदी के दाम चढ़े हैं और शेयर बाजार लुढ़क रहे हैं। भारत ने तटस्थ रुख अपनाते हुए अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
अगर पांच दिन में कोई समझौता नहीं हुआ तो पूर्ण युद्ध की आशंका बढ़ जाएगी। दुनिया सांस थामे अगले कदम का इंतजार कर रही है। क्या डिप्लोमेसी जीतेगी या टकराव? समय ही बताएगा।
















