केंद्र सरकार ने रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की बुकिंग और उपभोग पर नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब घरेलू उपभोक्ताओं को सालाना मिलने वाले कोटे से ज्यादा सिलेंडर लेना हो तो उन्हें अलग तरह की प्रक्रिया और अलग दर बुक करनी पड़ती है। इन नियमों का मकसद सरकार द्वारा जमाखोरी, कालाबाजारी और गैर‑वैध उपभोग रोकना बताया जा रहा है।

Table of Contents
एक साल में कितने सिलेंडर मिलते हैं?
एक घरेलू LPG कनेक्शन पर अब एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) तक लगभग 12–15 सिलेंडर तक का आवंटन माना जाता है। इनमें 12 सिलेंडर सब्सिडी वाली दर पर माने जाते हैं, जबकि अगले 3 सिलेंडर अतिरिक्त या “नॉन‑सब्सिडी” श्रेणी में आते हैं। इस सीमा के बाद जो भी सिलेंडर लिया जाएगा, वह सामान्य दर पर ही बिकेगा, यानी ज्यादा कीमत पर।
कोटे से ज्यादा चाहिए तो क्या करना होगा?
अगर किसी परिवार की जरूरत साल में 12 से ज्यादा सिलेंडर की है, तो उसे कोटे से आगे जाने के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी होगी। पहले 12 सिलेंडर तक सामान्य बुकिंग होती है, लेकिन 13वें सिलेंडर से उपभोक्ता को ऑनलाइन पोर्टल पर “सब्सिडी नहीं” या “सामान्य मूल्य” वाला ऑप्शन चुनना पड़ता है। इसे अक्सर नॉन‑सब्सिडी रिफिल कहा जाता है, जो सरकारी अनुदान के बिना बाजार दर पर मिलता है।
कुछ राज्यों और गैस एजेंसियों में जहां यूजर 15 से ज्यादा सिलेंडर लेना चाहता है, वहां लिखित आवेदन या जरूरत का कागजी दस्तावेज देना अनिवार्य किया जा सकता है। बड़े परिवार, बहुत सदस्यों वाले घर, विशेष आर्थिक या चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर आवेदन किया जाता है। इसे गैस एजेंसी या जिला ऑफिस में जमा करने के बाद अतिरिक्त आवंटन की स्वीकृति दी जा सकती है। इस तरह यह सुनिश्चित किया जाता है कि ज्यादा सिलेंडर वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचें, न कि शौक या जमाखोरी के लिए।
बुकिंग पर नया गैप और OTP नियम
नए नियमों के तहत अब एक LPG सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगले रिफिल के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना जरूरी है। पहले यह अवधि 21 दिन थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में कुछ जगहों पर यह अवधि 45 दिन तक बनाई गई है, ताकि वहां भी गैस की समान सप्लाई बनी रहे।
साथ ही हर सिलेंडर डिलीवरी पर अब डिलीवरी स्टाफ को एक OTP या ऑथेंटिकेशन कोड जनरेट करना अनिवार्य किया गया है। इससे यह जांच सकते हैं कि गैस सही पते और सही नामांकित उपभोक्ता को ही पहुंचे। इससे गलत जगह डिलीवरी, फर्जी उपभोक्ता या गैर‑कानूनी रिसेलिंग की संभावना कम होती है। इन नियमों के जरिए अतिरिक्त सिलेंडर लेने वाले यूजर्स की पहचान सीधे सरकारी और गैस कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होती है, जिससे गैर‑जरूरी या अत्यधिक उपभोग को पहचानना आसान हो जाता है।
सब्सिडी से बाजार दर की ओर झुकाव
इन नियमों के साथ सरकार सब्सिडी वाले रेजिम को धीरे‑धीरे कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जो लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर लेना चाहते हैं, उन्हें अब उच्च दर और अतिरिक्त प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। इससे आम उपभोक्ता के लिए गैस सिलेंडर लेने की प्रक्रिया ज्यादा विनियमित हुई है, लेकिन जरूरत‑आधारित उपभोग को बढ़ावा देते हुए अनावश्यक उपयोग को रोकने का संकेत भी साफ हो रहा है।
















