भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग व्यवस्था में नकदी की कमी दूर करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। हाल ही में 25,101 करोड़ रुपये की अल्पकालिक नकदी डाली गई, जबकि सोमवार 23 मार्च को 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी नीलामी का कार्यक्रम है। मौसमी कारणों से उत्पन्न तरलता दबाव को देखते हुए ये उपाय बाजार की स्थिरता बनाए रखने में कारगर साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का आकलन है कि इससे क्रेडिट प्रवाह को गति मिलेगी, हालांकि लोन की किस्तें तत्काल सस्ती होने की संभावना कम है।

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वीआरआर नीलामी का मतलब
वेरिएबल रेट रेपो नीलामी रिजर्व बैंक का एक लचीला उपकरण है। बैंकों को अपनी आवश्यकता अनुसार बोली लगाने का अवसर मिलता है, और तय दर पर अल्पकालिक धन उपलब्ध होता है। हाल की तीन दिवसीय नीलामी में अपेक्षा से कम सब्सक्रिप्शन रहा, क्योंकि कर भुगतान से नकदी निकासी हुई। कटऑफ दर मौजूदा नीति दर से मामूली ऊपर रही। इससे पहले भी इसी तरह के इंजेक्शन दिए गए थे, जो सिस्टम में संतुलन लाए। वर्तमान अधिशेष करीब 17,000 करोड़ रुपये के आसपास है।
नीलामी का समय और प्रक्रिया
23 मार्च को सुबह नौ बजकर तीस मिनट से दस बजे तक ओवरनाइट नीलामी चलेगी। प्राप्त धन अगले दिन वापस होगा। यह कदम अग्रिम कर और अन्य मौसमी आउटफ्लो को कवर करने के लिए है। बैंकिंग क्षेत्र में तरलता प्रबंधन अब नियमित प्रक्रिया बन चुका है। जनवरी में भी इसी तरह बड़े पैमाने पर सहायता दी गई थी, जिससे बाजार सुचारू रहा।
लोनधारकों पर संभावित असर
तरलता बढ़ने से बैंकों का फंडिंग खर्च कम हो सकता है, जिसका लाभ उधारकर्ताओं को मिले। नीति दरों में हालिया समायोजन के बाद कई ऋण दरें नौ प्रतिशत से नीचे आ चुकी हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक उन्नत क्रेडिट वृद्धि दिखा रहे हैं, मगर लाभ मार्जिन पर चुनौतियां हैं। अल्पकालिक इंजेक्शन से ब्याज दरों पर तुरंत बदलाव नहीं आता, लेकिन निरंतर उपलब्धता से नीतिगत ढील की उम्मीदें बढ़ सकती हैं। मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने से ऐसी संभावनाएं मजबूत हैं।
व्यापक आर्थिक लाभ
ये उपाय आर्थिक गतिविधियों को बिना महंगाई बढ़ाए सहारा देते हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में केंद्रीय बैंक की सतर्क रणनीति सराहनीय है। निवेशक विश्वास बढ़ेगा और उधार प्रवाह सुधरेगा। कुल मिलाकर, नकदी प्रबंधन से व्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। लोन सस्ते होने का वास्तविक फायदा दीर्घकालिक नीतियों पर निर्भर करेगा।
















