
यदि आप नौकरी या किसी अन्य कारण से एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट हो रहे हैं, तो अब आपको अपनी पुरानी गाड़ी के ट्रांसफर के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के चक्कर नहीं काटने होंगे, केंद्र सरकार और नीति आयोग एक ऐसी क्रांतिकारी योजना पर काम कर रहे हैं, जिससे ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) की अनिवार्य शर्त को खत्म कर दिया जाएगा।
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डिजिटल क्लीयरेंस से आसान होगा सफर
अभी तक के नियमों के मुताबिक, गाड़ी को दूसरे राज्य में ले जाने और वहां रजिस्टर कराने के लिए मूल RTO से फिजिकल NOC लेना जरुरी होता है। इस प्रक्रिया में हफ्तों का समय और काफी भागदौड़ लगती है, अब सरकार ‘वाहन पोर्टल’ (VAHAN Portal) के जरिए ऑटोमेटेड डिजिटल क्लीयरेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है।
इस नए सिस्टम के तहत, जिस राज्य में आप गाड़ी ले जा रहे हैं, वहां का RTO सीधे डिजिटल पोर्टल से आपकी गाड़ी का डेटा (जैसे टैक्स भुगतान, फिटनेस और चालान की स्थिति) चेक कर लेगा। अगर सब कुछ सही पाया जाता है, तो फिजिकल कागज की जरूरत नहीं पड़ेगी।
फिटनेस को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार अब गाड़ी की उम्र (जैसे 10 या 15 साल की सीमा) के बजाय उसकी कंडीशन और फिटनेस पर ज्यादा जोर दे रही है, नीति आयोग के प्रस्ताव के अनुसार, यदि आपकी गाड़ी फिटनेस टेस्ट पास कर लेती है, तो उसे दूसरे राज्य में चलाने और ट्रांसफर करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आएगी।
बकाया भुगतान है जरुरी
डिजिटल नियमों में पारदर्शिता का खास ख्याल रखा गया है। वाहन ट्रांसफर करने से पहले सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि गाड़ी पर कोई:
- ट्रैफिक चालान (Challan) लंबित न हो।
- रोड टैक्स (Road Tax) बकाया न हो।
- टोल टैक्स का भुगतान पूरा हो।
यदि कोई भी बकाया राशि पोर्टल पर दिखेगी, तो उसे चुकाए बिना डिजिटल क्लीयरेंस मिलना संभव नहीं होगा।
क्या होगा फायदा?
इस कदम से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि आम जनता के समय की भी भारी बचत होगी, वर्तमान में परिवहन मंत्रालय (MoRTH) इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है फिलहाल, कई सेवाओं को ‘परिवहन सेवा’ पोर्टल पर पहले ही कॉन्टैक्टलेस बनाया जा चुका है, जो इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
















