केंद्रीय विद्यालय संगठन के एडमिशन 2026 की घड़ी बज चुकी है। देशभर के अभिभावक अपने बच्चों को इन नामी स्कूलों में जगह दिलाने को आतुर हैं। सवाल उठना लाजमी है कि क्या यहां पढ़ाई पूरी तरह मुफ्त है? हकीकत यह है कि नाममात्र की फीस के साथ कई वर्गों को पूर्ण छूट मिलती है, जो इसे हर तबके के लिए सुलभ बनाती है।

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फीस का पूरा खुलासा
एडमिशन के समय केवल 25 रुपये देने होते हैं। ट्यूशन फीस कक्षा के हिसाब से तय है। कक्षा 1 से 5 तक के लड़कों से सालाना 300 रुपये, छठी से दसवीं तक 480 रुपये और ग्यारहवीं-बारहवीं के लिए 600 रुपये वसूले जाते हैं। इसके ऊपर विद्यालय विकास निधि के तौर पर 500 रुपये हर तिमाही, साथ ही कंप्यूटर फंड, लाइब्रेरी और खेलकूद के छोटे-मोटे शुल्क जुड़ते हैं। कुल मिलाकर एक सामान्य लड़के छात्र का सालाना खर्च 5 से 7 हजार रुपये के आसपास रहता है। लेकिन लड़कियों को हर कक्षा में ट्यूशन फीस से छूट है।
किन्हें मिलती है पूरी मुफ्त शिक्षा
सभी लड़कियां ट्यूशन फीस से बेदाग रहती हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के बच्चों को भी यही सुविधा। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के बच्चों को हर तरह की फीस माफ कर दी जाती है। केंद्रीय कर्मचारियों, सेना और अर्धसैनिक बलों के बच्चों को प्राथमिकता के साथ राहत मिलती है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए सुरक्षित हैं, जहां चयन लॉटरी से होता है।
केवीएस को अलग क्या बनाता है
देश में 1250 से ज्यादा केंद्रीय विद्यालय फैले हैं, जो सीबीएसई पाठ्यक्रम पर चलते हैं। अंग्रेजी और हिंदी दोनों माध्यमों में पढ़ाई होती है। विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी धाराओं का चयन संभव है। खेल, कला और अतिरिक्त गतिविधियों पर खास ध्यान दिया जाता है। केंद्रीय नौकरियों की वजह से स्थानांतरण आसान होने पर भी शिक्षा में एकरूपता बनी रहती है। बोर्ड परीक्षाओं में 99 प्रतिशत से अधिक सफलता दर इसे विश्वसनीय बनाती है। प्राइवेट संस्थानों का किफायती विकल्प होने से मध्यम वर्ग का पहला चुनाव यही है।
एडमिशन की ताजा प्रक्रिया
कक्षा 1 के लिए आवेदन 20 मार्च से 2 अप्रैल तक खुले रहेंगे। छठी और नौवीं कक्षा के दाखिले भी शुरू हो चुके हैं। प्राथमिकता सूची और लॉटरी प्रणाली से चयन होगा। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरें और गरीबी रेखा प्रमाणपत्र की जांच कर लें। सीटें सीमित हैं, इसलिए जल्दी करें।
















