
अगर आप अपना मकान या दुकान किराए पर देने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, सरकार द्वारा लागू किए गए ‘मॉडल टेनेंसी एक्ट’ (Model Tenancy Act) ने रेंट एग्रीमेंट और किराएदारी के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, इन नियमों की अनदेखी न केवल आपको कानूनी पचड़े में फंसा सकती है, बल्कि आपकी प्रॉपर्टी और गाढ़ी कमाई को भी जोखिम में डाल सकती है।
Table of Contents
लिखित समझौता और पंजीकरण है अनिवार्य
अब मौखिक रेंट एग्रीमेंट का दौर खत्म हो चुका है। नए कानून के तहत किसी भी संपत्ति को किराए पर देने के लिए लिखित समझौता करना अनिवार्य है। इतना ही नहीं, एग्रीमेंट होने के दो महीने के भीतर इसे स्थानीय ‘रेंट अथॉरिटी’ के पास पंजीकृत (रजिस्टर) कराना भी जरूरी है। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो विवाद की स्थिति में आपका पक्ष कमजोर पड़ सकता है और भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
सिक्योरिटी डिपॉजिट की तय हुई सीमा
अक्सर देखा जाता था कि मकान मालिक मनमाना सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए एक्ट के मुताबिक:
- आवासीय संपत्ति: मकान मालिक अधिकतम 2 महीने का किराया ही सिक्योरिटी के तौर पर ले सकते हैं।
- व्यावसायिक संपत्ति: दुकानों या ऑफिस के लिए यह सीमा अधिकतम 6 महीने तय की गई है।
इस नियम का उल्लंघन करने पर मकान मालिक को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
कब्जा खाली न करने पर लगेगा ‘भारी जुर्माना’
मकान मालिकों के लिए सबसे बड़ी राहत बेदखली के नियमों में दी गई है अगर किराएदार एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी घर खाली नहीं करता है, तो मकान मालिक को भारी मुआवजा पाने का अधिकार है:
- शुरुआती दो महीनों के लिए दोगुना किराया वसूला जा सकता है।
- उसके बाद भी कब्जा बरकरार रहने पर, किराएदार को मासिक किराए का चार गुना तक भुगतान करना होगा।
कानून यह भी स्पष्ट करता है कि विवाद की स्थिति में भी मकान मालिक किराएदार की बिजली या पानी जैसी अनिवार्य सेवाएं बंद नहीं कर सकता। किसी भी निरीक्षण के लिए मकान मालिक को 24 घंटे पहले नोटिस देना अनिवार्य है।
इन नियमों का पालन कर आप अपनी संपत्ति को सुरक्षित रख सकते हैं और भविष्य के विवादों से बच सकते हैं।
















