
अगर आपने एप्पल, टेस्ला या माइक्रोसॉफ्ट जैसी विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है और उससे मिलने वाले डिविडेंड (लाभांश) को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में नहीं दिखाया है, तो सावधान हो जाइए आयकर विभाग अब विदेशी संपत्तियों को छिपाने वालों पर बेहद सख्त रुख अपना रहा है, विभाग ने साफ किया है कि विदेशी आय की जानकारी छिपाना ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ के दायरे में आता है, जिस पर भारी-भरकम पेनल्टी लगाई जा सकती है।
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200% जुर्माना और जेल की भी नौबत
आयकर नियमों के मुताबिक, विदेशी निवेश से हुई आय को छिपाने पर टैक्स देनदारी का 50% से लेकर 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, मामला अगर काला धन अधिनियम (Black Money Act) के तहत आता है, तो प्रति वर्ष 10 लाख रुपये का जुर्माना और 6 महीने से 7 साल तक की जेल भी हो सकती है।
AI की नजर में है आपका हर ट्रांजेक्शन
अब विदेशी निवेश को छिपाना नामुमकिन होता जा रहा है। आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और विभिन्न देशों के साथ ‘ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन’ समझौते के जरिए डेटा जुटा रहा है। इससे विदेशी बैंक खातों और शेयर होल्डिंग की जानकारी विभाग को आसानी से मिल रही है।
ITR भरते समय इन 2 बातों का रखें खास ख्याल:
- सही फॉर्म का चुनाव: विदेशी संपत्ति (Foreign Assets) की घोषणा करने वाले करदाताओं को ITR-2 या ITR-3 ही भरना चाहिए। ITR-1 (सहज) में विदेशी संपत्ति दिखाने का विकल्प नहीं होता।
- शेड्यूल FA और FSI: विदेशी शेयरों का विवरण Schedule FA में और उनसे होने वाली कमाई (डिविडेंड या कैपिटल गेन्स) को Schedule FSI में दर्ज करना अनिवार्य है।
अभी भी है सुधार का मौका
अगर आपसे पिछले ITR में यह जानकारी छूट गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, आप Updated Return (ITR-U) फाइल करके अपनी गलती सुधार सकते हैं, समय रहते जानकारी देने से आप भारी जुर्माने और कानूनी पचड़ों से बच सकते हैं।
















