
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम विश्वकर्मा योजना ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। सितंबर 2023 में शुरू हुई यह योजना अब 2026 में भी पूरी गति से चल रही है, जिसमें बिना गारंटी के सस्ता बिजनेस लोन, कौशल प्रशिक्षण और आधुनिक औजारों के लिए ₹15,000 का ई-वाउचर प्रमुख लाभ हैं। देशभर के बढ़ई, लोहार, सुनार जैसे 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लाखों कारीगरों ने इसका लाभ उठाया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
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योजना का उद्देश्य और प्रभाव
योजना का उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ को साकार करना है। पारंपरिक शिल्प जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं, वे आधुनिक तकनीक से लैस होकर वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें। अब तक करोड़ों आवेदन दर्ज हो चुके हैं, और CSC केंद्रों के माध्यम से रजिस्ट्रेशन आसान बना दिया गया है।
पात्रता: 18 व्यवसायों को विशेष लाभ
यह योजना विशेष रूप से 18 निर्धारित ट्रेड्स के कारीगरों के लिए है। इनमें बढ़ई (कार्पेंटर), लोहार (ब्लैकस्मिथ), सुनार (गोल्डस्मिथ), कुम्हार (पॉटर), मूर्तिकार, मोची (कोबलर), राजमिस्त्री (मेसन), दर्जी (टेलर), नाई (बार्बर), धोबी (वॉशरमैन), चित्रकार, बुनकर आदि शामिल हैं। पात्रता की मुख्य शर्तें सरल हैं: आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो, वह सक्रिय रूप से इनमें से किसी व्यवसाय में लगा हो।
परिवार से केवल एक सदस्य ही आवेदन कर सकता है। पिछले 5 वर्षों में PMEGP, PM SVANidhi या MUDRA जैसी सरकारी क्रेडिट योजनाओं का लाभ न लिया हो। सरकारी नौकरी में कार्यरत व्यक्ति या उनके परिवार के सदस्य अयोग्य हैं। इससे योजना का दुरुपयोग रोका गया है।
प्रमुख लाभ: लोन से ट्रेनिंग तक
योजना के तहत टूलकिट प्रोत्साहन सबसे बड़ा आकर्षण है। बेसिक ट्रेनिंग (5-7 दिन) पूरी करने पर ₹15,000 का ई-वाउचर सीधे खाते में आता है, जिससे आधुनिक औजार खरीदे जा सकते हैं। उन्नत ट्रेनिंग (15 दिन) में प्रतिदिन ₹500 स्टाइपेंड भी मिलता है।
सस्ता बिजनेस लोन योजना का मूल आधार है। कोलैटरल-फ्री पहले चरण में ₹1 लाख (18 महीने, 5% ब्याज), समय पर चुकाने पर दूसरे चरण में ₹2 लाख (30 महीने, 5% ब्याज), कुल ₹3 लाख तक। इसके अलावा PM विश्वकर्मा ID कार्ड, सर्टिफिकेट और मार्केटिंग सपोर्ट भी प्रदान किया जाता है।
रजिस्ट्रेशन: CSC केंद्र ही काफी
रजिस्ट्रेशन पूरी तरह ऑनलाइन लेकिन CSC केंद्रों के माध्यम से। नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) पर जाएं, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, आधार-लिंक्ड मोबाइल साथ ले जाएं। CSC ऑपरेटर pmvishwakarma.gov.in पर विवरण भरेंगे, बायोमेट्रिक e-KYC करेंगे।
फिर 3-चरणीय सत्यापन: ग्राम पंचायत/शहरी निकाय, जिला समिति और स्क्रीनिंग कमिटी। स्वीकृति पर PM विश्वकर्मा ID मिलेगा, ट्रेनिंग शुरू होगी। बैंक खाता न हो तो CSC ही खुलवा देगा। राशन कार्ड या परिवार के आधार नंबर भी जरूरी।
जमीनी प्रभाव और चुनौतियां
दिल्ली के एक दर्जी ने बताया, “₹15,000 से नई सिलाई मशीन ली, अब ऑनलाइन ऑर्डर लेता हूं। ₹1 लाख लोन से दुकान बढ़ाई।” उत्तर प्रदेश के लोहारों ने आधुनिक उपकरणों से उत्पादन दोगुना कर लिया। योजना से 13 लाख से अधिक कारीगर लाभान्वित हो चुके हैं।
चुनौतियां भी हैं- जागरूकता की कमी, सत्यापन में देरी। लेकिन सरकार ने CSC VLEs को प्रोत्साहित किया है। अपने जिले के CSC या विशिष्ट ट्रेड लाभ के लिए pmvishwakarma.gov.in चेक करें। यह योजना कारीगरों को सशक्त बनाकर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
















