
डिजिटल लेनदेन के इस दौर में क्रेडिट कार्ड जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। शॉपिंग से लेकर ट्रैवल तक, हर खर्चे में यह प्लास्टिक मनी हमारा साथी है। लेकिन सावधान! एक छोटी लापरवाही आपको इनकम टैक्स विभाग के रडार पर ला सकती है। इनकम टैक्स ड्राफ्ट रूल्स 2026 के तहत 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए पांच बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें ₹1 लाख कैश पेमेंट या ₹10 लाख डिजिटल बिल पर सख्त निगरानी शामिल है। ₹1 लाख की सीमा पार होते ही नोटिस मिलने का जोखिम बढ़ जाएगा।
सरकार का मकसद काले धन पर लगाम लगाना और पारदर्शिता लाना है। ड्राफ्ट नियम इनकम टैक्स रूल्स 1962 की जगह लेंगे, लेकिन अभी हितधारकों से फीडबैक मांगा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिग डेटा और AI से अब हर हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन रियल-टाइम ट्रैक होगा। AIS (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) में ITR से मिलान होने पर विसंगति पकड़ी जाएगी।
Table of Contents
₹1 लाख कैश भुगतान पर सख्ती
एक वित्त वर्ष में अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड बिल का ₹1 लाख या इससे ज्यादा नकद चुकाते हैं, तो बैंक या कार्ड जारीकर्ता यह डिटेल आयकर विभाग को SFT (स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन) के जरिए रिपोर्ट करेगा। पुराने नियमों में भी यह प्रावधान था, लेकिन नए ड्राफ्ट में इसे और साफ-सुथरा बनाया गया है। कैश से बचें, क्योंकि यह सबसे बड़ा ट्रिगर है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपकी सालाना आय ₹10 लाख है लेकिन कार्ड खर्च ₹15 लाख, तो विभाग धारा 142(1) के तहत स्पष्टीकरण मांगेगा।
₹10 लाख डिजिटल सीमा पार पर नजर
कैश से इतर UPI, चेक या नेट बैंकिंग से कुल ₹10 लाख बिल पेमेंट होने पर भी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। विभाग जांचेगा कि खर्च आय के अनुपात में है या नहीं। पिछले साल कई यूजर्स को इसी आधार पर ई-कैंपेन नोटिस मिले। अब AIS-26AS एकीकरण से ट्रैकिंग तेज होगी।
कॉर्पोरेट कार्ड पर टैक्स का जाल
कंपनी द्वारा दिया कार्ड अगर पर्सनल खर्च (क्लब मेंबरशिप, ऐनुअल फीस) पर इस्तेमाल होता है, तो इसे पर्क्विजिट मानेगा। कर्मचारी को टैक्स चुकाना पड़ेगा। सिर्फ आधिकारिक खर्च टैक्स-फ्री, बशर्ते कंपनी प्रमाणपत्र और रिकॉर्ड दे। HR पॉलिसी में बदलाव जरूरी।
राहत की खबरें: PAN और टैक्स पेमेंट
PAN कार्ड अप्लाई में क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट (3 महीने पुराना न हो) अब एड्रेस प्रूफ बनेगा। क्रेडिट कार्ड से डायरेक्ट टैक्स भुगतान भी संभव। नए कार्ड के लिए PAN अनिवार्य।
बचाव के आसान उपाय
- ITR में खर्च-आय मैच रखें।
- हमेशा डिजिटल पेमेंट चुनें।
- AIS/TIS नियमित चेक करें (incometax.gov.in पर)।
- नोटिस मिले तो 15-30 दिनों में बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म-16 अपलोड करें। अनदेखी पर ₹1,000-10,000 जुर्माना या प्रॉपर्टी अटैचमेंट।
ये बदलाव डिजिटल इंडिया को मजबूत करेंगे, लेकिन जागरूकता जरूरी। क्या PAN नियमों में और ढील मिलेगी? बजट 2026 में फाइनल अपडेट। सतर्क रहें, टैक्समैन सो रहा नहीं!
















