
उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाले बहुप्रतीक्षित शामली-गोरखपुर एक्सप्रेस-वे को लेकर बड़ी खबर सामने आई है, इस प्रोजेक्ट के लिए बहराइच जिले की महसी तहसील के 25 गांवों को चिह्नित किया गया है, एक्सप्रेस-वे के रुट में आने वाले इन गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से बैन (Ban) लगा दिया है।
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प्रशासनिक सख्ती: 1323 गाटों की खरीद-फरोख्त बंद
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर महसी तहसील के इन 25 गांवों की सूची उपजिलाधिकारी और उपनिबंधक को भेज दी गई है आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इन गांवों के कुल 1323 गाटे (प्लॉट) एक्सप्रेस-वे के दायरे में आ रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि मुआवजे की प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली या विवाद को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब इन चिह्नित जमीनों की रजिस्ट्री या उन पर पक्का निर्माण तब तक नहीं हो सकेगा, जब तक अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
इन जिलों में भी बढ़ा हलचल का पारा
सिर्फ बहराइच ही नहीं, इस 700 किमी से अधिक लंबे एक्सप्रेस-वे के लिए यूपी के अन्य जिलों में भी तैयारियां तेज हैं:
- सिद्धार्थनगर: जिले की तीन तहसीलों के 145 गांवों में भूमि लेनदेन पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।
- बरेली: यहाँ नवाबगंज और बहेड़ी तहसील के 68 गांवों में अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
- बलरामपुर व पीलीभीत: यहाँ भी लगभग 100 से अधिक गांवों की जमीन इस मेगा प्रोजेक्ट की जद में है।
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क्यों खास है यह एक्सप्रेस-वे?
लगभग 35,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के 22 जिलों को आपस में जोड़ेगा, यह शामली से शुरु होकर गोरखपुर तक जाएगा, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के बीच की दूरी घंटों कम हो जाएगी, इस मार्ग के किनारे औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
यदि आप इन प्रभावित क्षेत्रों में जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो पहले तहसील कार्यालय से गाटा संख्या की जांच जरुर कर लें, ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
















