केंद्र सरकार ने आयकर प्रणाली में व्यापक सुधार की घोषणा की है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियम पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह बदल देंगे। इन बदलावों से नौकरीपेशा लोगों की मासिक आय और निवेशकों की बचत पर सीधा असर पड़ेगा। मिडिल क्लास को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन उच्च आय वालों के लिए अनुपालन कठिन होगा।

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रिटायरमेंट फंड्स पर नया टैक्स बोझ
कंपनियां अब कर्मचारियों के लिए पीएफ, एनपीएस और सुपरएनुएशन में सालाना 7.5 लाख रुपये से अधिक जमा नहीं कर सकेंगी बिना टैक्स दिए। अतिरिक्त राशि को सैलरी का हिस्सा गिना जाएगा। इन फंड्स पर ब्याज की गणना का तरीका भी बदलेगा। इससे करोड़ों लोगों की पोस्ट-रिटायरमेंट प्लानिंग प्रभावित होगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अभी से वैकल्पिक निवेश विकल्प तलाशें।
सैलरी भत्तों में बड़े बदलाव
कंपनी द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं जैसे आवास, वाहन, ऋण, उपहार और मुफ्त भोजन पर टैक्स मूल्यांकन नया होगा। उदाहरण के लिए, मेट्रो शहरों में मिलने वाले घर की सुविधा सैलरी का 10 प्रतिशत मानी जाएगी। एचआरए छूट अब पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे शहरों तक विस्तारित हो गई है। विलंबित सैलरी या ग्रेच्युटी पर विशेष फॉर्म से राहत का प्रावधान सरल हुआ है। फॉर्म 16 और मानक कटौती में संशोधन से टीडीएस राशि कम हो सकती है।
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निवेश और व्यापार पर सख्ती
शेयर बाजार लेन-देन, विदेशी पूंजी और डिजिटल कारोबार के लिए रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। एनआरआई और व्यवसायियों को स्टॉक एक्सचेंज नियमों का पालन करना पड़ेगा। रिटायरमेंट कोषों की सीमाएं स्पष्ट होंगी, लेकिन डिजिटल अर्थव्यवस्था पर पाबंदियां बढ़ेंगी। संपत्ति सौदों और व्यवसायिक लेन-देन पर टीडीएस दरें ऊंची होंगी। छोटे निवेशकों को अब पहले से अधिक सावधानी बरतनी होगी।
फाइलिंग प्रक्रिया में सुधार
आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाई गई है। हालांकि सत्यापन प्रक्रिया कठोर होगी। मध्यम आय वालों के लिए स्लैब दरें अनुकूल होंगी, जबकि उच्च आय पर बोझ बढ़ेगा। पूरी प्रक्रिया डिजिटल अनिवार्य होगी, जिसमें जुर्माना दोगुना है। रिफंड मिलना तेज होगा, किंतु दस्तावेजीकरण न्यूनतम रहेगा।
करदाताओं के लिए सलाह
वित्त मंत्रालय का जोर सरलता और पारदर्शिता पर है। फिर भी चार्टर्ड अकाउंटेंट चेताते हैं कि बदलावों से छोटे निवेशक परेशान हो सकते हैं। 31 मार्च से पहले वित्तीय योजना की समीक्षा करें। नई सैलरी स्लिप और निवेश रणनीति तैयार रखें। ये नियम सभी को प्रभावित करेंगे, इसलिए जागरूकता जरूरी है।
















